औ रे जगत जननी ये तेरी कैसी माया
अपने आँचल से देती हमको छाया
काल के कपाल पे लिख कर अपने लहू से
वन्दे मातरम गान हमने गाया .
"शायर की शायरी का यूँ मज़ाक़ न बनाओ जनाब, तिनका का भी अगर आँखों में चला जाये तो उनकी ज्योति ले लेता है, ये तो काफ़िर एक शायर है शब्दो की जवाला से खेलने की हिमाकत रखता है"
#tokentalks
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