"रात की चांदनी या भोर की वो पहली किरण हो,
रक्त भले ही भुजावो में ना हो,
रक्षक ही है वो इस देश का ,
जो रंग के अपने लहू से लिखता हिंदुस्तान हो।"
रक्त भले ही भुजावो में ना हो,
रक्षक ही है वो इस देश का ,
जो रंग के अपने लहू से लिखता हिंदुस्तान हो।"
"शायर की शायरी का यूँ मज़ाक़ न बनाओ जनाब, तिनका का भी अगर आँखों में चला जाये तो उनकी ज्योति ले लेता है, ये तो काफ़िर एक शायर है शब्दो की जवाला से खेलने की हिमाकत रखता है"
#tokentalks
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