Wednesday, August 29, 2018


मज़बूरिया कैसी है यहाँ अब इस दिल की बताए क्या, 
पूछ रहा इस मंज़र से क्या रिस्ता है तेरा मुझ से, परछाईयो मे जी रहा ये दिल बी ऐसे, 
जीना  बी तेरे बिन सीख लिया है  इन मज़बूरियों  से,


Monday, August 20, 2018


मंज़िल कुछ बनाओ ऐसी,

पहुंचने की जहाँ  तक हिमाकत  रखते हो.
डरो ना इन चमकती बिज़लिओ  से,
अगर दिल  मे  कुछ कर गुज़रने का हौसला रखते हों
माना हमेशा  जीत  होती नहीं,
हरा दो उस  हार को जो तुम्हे हारने का ज़ज़्बा रखती हो.

Saturday, August 18, 2018

नदियों की धारा की तरह जो बहे ऐसे बहने की चाहत रखते है ,
          इश्क़ के समन्दर में डुबने की दिली ख्वाइश रखते है ,
       मन से चाहा तुम्हे इतना है औ जानम,
     अब न मिली तो क्या हुआ, सात जन्मो में से एक जन्म में  मिलने की चाहत  रखते है ।




    

Thursday, August 16, 2018

पोखराम से भारत के नए उज्वल भविष्य की बात हो,
या पाकिस्तान को कारगिल में धूल चटाने की बात हो,
एस वतन के लिए अपने जीवन को निछावर करने वाले महापुरुष थे कौन  
        वो अटल थे , वो अटल थे 

Tuesday, August 14, 2018

ऐ वतन गीत तेरे लिए सुनाता जाता हू ,
चंद्र शेखर की आवाज़ को सुनाता हुआ मुस्कराता हू ,
शीचने वाले अपने लहू से इस देश की धरती को भगत सिंह की वो शहादत याद दिलाता हू ,

आजादी  दिलाने  वालो उन सपूतो को  नमन करता हुआ मै वन्दे मातरम दोहराता हु ,
वन्दे मातरम दोहराता हू ,

Tuesday, August 7, 2018

औ रे जगत जननी ये तेरी कैसी माया
अपने आँचल से देती हमको छाया
काल के कपाल पे लिख कर अपने लहू से
वन्दे मातरम गान हमने गाया .
इस देश की माटी  का कर्ज चुक्का कर हम जाएगे
ए वतन  अपने लहू  से रंग कर तुजे  सजायेंगे 
कैसा ये इंतहां जिंदगी जो ले रही
रहमत  सास लेनी तक नहीं है 
कहा सपनो को जीना सीख लिया हमने 
दिल के टूटने का दर्द इतना था गालीब, आँखों के आँसू भी रोकते हुए चुप रहे नहीं है.


Wednesday, August 1, 2018

"रात की चांदनी या भोर की वो पहली किरण हो,
 रक्त भले ही भुजावो में ना हो,
रक्षक ही है वो इस देश का ,
जो रंग के अपने लहू से लिखता हिंदुस्तान हो।"

#tokentalks