कैसा ये इंतहां जिंदगी जो ले रही
रहमत सास लेनी तक नहीं है
कहा सपनो को जीना सीख लिया हमने
दिल के टूटने का दर्द इतना था गालीब, आँखों के आँसू भी रोकते हुए चुप रहे नहीं है.
"शायर की शायरी का यूँ मज़ाक़ न बनाओ जनाब, तिनका का भी अगर आँखों में चला जाये तो उनकी ज्योति ले लेता है, ये तो काफ़िर एक शायर है शब्दो की जवाला से खेलने की हिमाकत रखता है"
#tokentalks
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