Tuesday, August 7, 2018

कैसा ये इंतहां जिंदगी जो ले रही
रहमत  सास लेनी तक नहीं है 
कहा सपनो को जीना सीख लिया हमने 
दिल के टूटने का दर्द इतना था गालीब, आँखों के आँसू भी रोकते हुए चुप रहे नहीं है.


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