Monday, October 1, 2018

वो मेरा इश्क़ है किसी की वफ़ा का गुलाम नहीं, 
वो महकते फूलो के हर्फ़ है जो कभी मुरझाये नहीं, 
दिलों की धड़कन था वो ऐसा इश्क़ था, 
आफताब था महकता एक ख्वाब था, 
सोचा है खुदा ने वो कबूल नहीं, 
वो मेरा इश्क़ है किसी की वफ़ा का  गुलाम नहीं, 
 जाता नहीं उन गलियों से जहाँ वफ़ा की उम्मीद  नहीं, 
 कुछ अल्फाज़ो के हरकत मे आने से मेरा इश्क़ मरा नहीं, 
 वो ऐसी मोहब्बत है जो रूह मे है जिस्मो मे  नहीं, 
 वो मेरा इश्क़ है किसी की वफ़ा का गुलाम नहीं, 

 -शुभम पांथरी

Friday, September 21, 2018



इश्क़ का सजदा करते है उसकी ताबीर  करते हुऐ, 
लेकिन इश्क़ के हर्फ़ ही हमसे खिलाफत करने लगे है, 
तो क्या सुकून दे उस उन्स के मुसाफ़िर को,
जो उसके एक तबस्सुम के लिए फलक तक जाने को संजीदा हो

- शुभम पांथरी 





Sunday, September 16, 2018


वो आफताब ही क्या जो रहमत ना दिखाए
वो इश्क़ ही क्या जिसकी कुरबत की ताबीर ना हो

- शुभम पांथरी

Saturday, September 15, 2018

सच्ची  मोहब्बत की इनायत सभी करते है,
कोई रिवायत का तो कोई मुन्तजिर के गुलाम है।

Thursday, September 13, 2018

वो आसमा चाहिए जहाँ इश्क़ की एबादत होती हो,. 
वो रहनुमा चाहिए जो मंज़िल तक पहुंचना सीखा दे, 
अब ये दिल हार चूका है इन सतरंज की महफ़िलो मे जाने से, 
कोई तो ऐसा मिले जो फिर से जीना  सीखा दे,  फिर से जीना  सीखा दे. 

Tuesday, September 11, 2018



चलो इन दीवारों पर कुछ लिख चलते है
तेरे इश्क़ पर भी एयू मरते है,
तेरे से ना कोई शिखवा ना  कोई गिला रखते है
तेरी मोहब्बत और बेवफाई को सलाम करते है ,सलाम करते है।

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