Monday, October 1, 2018

वो मेरा इश्क़ है किसी की वफ़ा का गुलाम नहीं, 
वो महकते फूलो के हर्फ़ है जो कभी मुरझाये नहीं, 
दिलों की धड़कन था वो ऐसा इश्क़ था, 
आफताब था महकता एक ख्वाब था, 
सोचा है खुदा ने वो कबूल नहीं, 
वो मेरा इश्क़ है किसी की वफ़ा का  गुलाम नहीं, 
 जाता नहीं उन गलियों से जहाँ वफ़ा की उम्मीद  नहीं, 
 कुछ अल्फाज़ो के हरकत मे आने से मेरा इश्क़ मरा नहीं, 
 वो ऐसी मोहब्बत है जो रूह मे है जिस्मो मे  नहीं, 
 वो मेरा इश्क़ है किसी की वफ़ा का गुलाम नहीं, 

 -शुभम पांथरी

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