दिलबरो चलो चलो उस नदिया के पार चलो
जहा का रुक सुहाना हो ,
जहा चलती हो रवानगी हवाओं में,
जहा मिट्टी में खुसबू हो,
क्या रखा है उस जिंदगी में जो जीई ना जाए,
क्या रखा है उस फलसफा में जो समझ ना आए,
दिलबरो चलो चलो उस नदिया के पार चलो
"शायर की शायरी का यूँ मज़ाक़ न बनाओ जनाब, तिनका का भी अगर आँखों में चला जाये तो उनकी ज्योति ले लेता है, ये तो काफ़िर एक शायर है शब्दो की जवाला से खेलने की हिमाकत रखता है"
#tokentalks
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