मज़बूरिया कैसी है यहाँ अब इस दिल की बताए क्या,
पूछ रहा इस मंज़र से क्या रिस्ता है तेरा मुझ से, परछाईयो मे जी रहा ये दिल बहलाते हुऐ खुद को,
जीना बी बिन तेरे सीख लिया है इन मज़बूरियों से,
"शायर की शायरी का यूँ मज़ाक़ न बनाओ जनाब, तिनका का भी अगर आँखों में चला जाये तो उनकी ज्योति ले लेता है, ये तो काफ़िर एक शायर है शब्दो की जवाला से खेलने की हिमाकत रखता है"
#tokentalks
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