आदत से मजबूर है ये दिल मोहब्बत में कुछ इस तरह,
की दर्द ए दिल को ही अपनी मोहब्बत बनाना चाहता है,
कोई मर्ज नहीं है दर्द ए दिल का खुदा के पास भी,
इसलिए ये दिल मोहब्बत को ही दिली खाईश बनाना चाहता है।
"शायर की शायरी का यूँ मज़ाक़ न बनाओ जनाब, तिनका का भी अगर आँखों में चला जाये तो उनकी ज्योति ले लेता है, ये तो काफ़िर एक शायर है शब्दो की जवाला से खेलने की हिमाकत रखता है"
#tokentalks
No comments:
Post a Comment